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ईद पर भी बंद रही श्रीनगर की जामा मस्जिद, उमर अब्दुल्ला बोले- अब तो लोगों पर भरोसा कीजिए
Jagran Desk
देशभर में जब ईद-उल-अजहा की नमाज अकीदत के साथ अदा की जा रही थी, तब श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद लगातार सातवें साल भी बंद रही। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से हर साल सुरक्षा कारणों से यहां ईद की नमाज पर रोक लगी हुई है। इस बार भी हालात नहीं बदले।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराज़गी
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मस्जिद बंद रखने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि इस बार मस्जिद क्यों बंद रखी गई, लेकिन हमें अब अपने लोगों पर भरोसा करना सीखना होगा। जिन्होंने हाल ही में हुए पहलगाम हमले की निंदा की, वो नमाज के लिए मस्जिद में क्यों नहीं जा सकते?"
सीएम उमर और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में ईद की नमाज अदा की।
महबूबा मुफ्ती ने भी जताया विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मस्जिद बंद रखने को धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा, "जब सब ठीक है, तो फिर मस्जिद के ताले क्यों नहीं खोले जा रहे? ईद के दिन मस्जिद बंद करना हमारे मजहब के खिलाफ है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को नजरबंद किया गया है।
2018 की घटना और सुरक्षा की दलील
श्रीनगर की नौहट्टा स्थित जामा मस्जिद को कश्मीर की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मस्जिदों में गिना जाता है। 2018 में जुमे की नमाज के बाद कुछ नकाबपोश युवकों ने यहां ISIS का झंडा फहराया था, जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी। इसके बाद से सुरक्षा बलों ने इसे संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर रखा है।
सरकार ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद COVID-19 महामारी और आतंकवाद की आशंका के चलते मस्जिद पर लगातार बंदिशें लगाई हैं।
हजरतबल दरगाह और अन्य मस्जिदों में शांति से हुई नमाज
हालांकि, श्रीनगर के हजरतबल दरगाह, आली मस्जिद और जम्मू की कई मस्जिदों में लोगों ने शांति के साथ नमाज अदा की। सुरक्षाबलों की कड़ी निगरानी के बीच कहीं से कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं आई। ईदगाह मैदान और जामा मस्जिद में अब भी नमाज की अनुमति नहीं दी गई है।
सवाल अब भी कायम
बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि अगर घाटी में शांति का दावा किया जा रहा है, तो फिर ईद जैसे त्यौहार पर धार्मिक स्थलों को बंद क्यों रखा जाता है? यह विषय केवल धार्मिक नहीं, बल्कि लोगों की भावना और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
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ईद पर भी बंद रही श्रीनगर की जामा मस्जिद, उमर अब्दुल्ला बोले- अब तो लोगों पर भरोसा कीजिए
Jagran Desk
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराज़गी
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मस्जिद बंद रखने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि इस बार मस्जिद क्यों बंद रखी गई, लेकिन हमें अब अपने लोगों पर भरोसा करना सीखना होगा। जिन्होंने हाल ही में हुए पहलगाम हमले की निंदा की, वो नमाज के लिए मस्जिद में क्यों नहीं जा सकते?"
सीएम उमर और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में ईद की नमाज अदा की।
महबूबा मुफ्ती ने भी जताया विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मस्जिद बंद रखने को धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा, "जब सब ठीक है, तो फिर मस्जिद के ताले क्यों नहीं खोले जा रहे? ईद के दिन मस्जिद बंद करना हमारे मजहब के खिलाफ है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को नजरबंद किया गया है।
2018 की घटना और सुरक्षा की दलील
श्रीनगर की नौहट्टा स्थित जामा मस्जिद को कश्मीर की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मस्जिदों में गिना जाता है। 2018 में जुमे की नमाज के बाद कुछ नकाबपोश युवकों ने यहां ISIS का झंडा फहराया था, जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी। इसके बाद से सुरक्षा बलों ने इसे संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर रखा है।
सरकार ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद COVID-19 महामारी और आतंकवाद की आशंका के चलते मस्जिद पर लगातार बंदिशें लगाई हैं।
हजरतबल दरगाह और अन्य मस्जिदों में शांति से हुई नमाज
हालांकि, श्रीनगर के हजरतबल दरगाह, आली मस्जिद और जम्मू की कई मस्जिदों में लोगों ने शांति के साथ नमाज अदा की। सुरक्षाबलों की कड़ी निगरानी के बीच कहीं से कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं आई। ईदगाह मैदान और जामा मस्जिद में अब भी नमाज की अनुमति नहीं दी गई है।
सवाल अब भी कायम
बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि अगर घाटी में शांति का दावा किया जा रहा है, तो फिर ईद जैसे त्यौहार पर धार्मिक स्थलों को बंद क्यों रखा जाता है? यह विषय केवल धार्मिक नहीं, बल्कि लोगों की भावना और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
