अंतरिक्ष से छात्रों को शुभांशु का संदेश: "उड़ने का डर रहता है, खुद को बांधकर सोता हूं"

Jagran Desk

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मौजूद भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने गुरुवार को लखनऊ और केरल के छात्रों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में जीवन, चुनौतियों और व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों को विज्ञान और स्पेस रिसर्च की ओर प्रेरित किया।

CMS स्कूल की कानपुर रोड ब्रांच में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने वीडियो कॉल के जरिए शुभांशु से सवाल पूछे। उन्होंने लाइव सेशन के दौरान स्पेस में तैरती गेंद से खेलकर जीरो ग्रैविटी का अनुभव दिखाया।


"स्पेस में नींद के लिए खुद को बांधना पड़ता है"

एक छात्र द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में शुभांशु ने बताया, "अंतरिक्ष में फर्श या छत जैसी कोई चीज नहीं होती, इसलिए नींद के समय खुद को विशेष पट्टियों से बांधना पड़ता है ताकि शरीर तैरकर कहीं और न चला जाए।"

उन्होंने मज़ाक में जोड़ा, "स्पेस में उड़ने का डर हमेशा बना रहता है, खासकर नींद के वक्त!"


योग और एक्सरसाइज से रखते हैं खुद को फिट

शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष में शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में रोज़ाना योग और एक्सरसाइज जरूरी होती है। वहां विशेष एक्सरसाइज मशीन होती हैं, जिनमें सीट नहीं होती, बस पैडल से खुद को बांधकर कसरत करनी होती है।


मनोरंजन और मानसिक सेहत का खास ध्यान

उन्होंने कहा कि स्पेस में मानसिक सेहत बनाए रखने के लिए परिवार और दोस्तों से संपर्क में रहना बहुत जरूरी है। टेक्नोलॉजी के जरिए नियमित रूप से कॉल और वीडियो से बातचीत की सुविधा होती है।


‘मिशन से पहले का खाना साथ लाते हैं’

खाद्य सामग्री के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ज्यादातर एस्ट्रोनॉट वही खाना लेते हैं जिसे वे धरती पर खाते थे। उन्होंने बताया कि वे अपने साथ गाजर का हलवा, मूंग दाल हलवा और आम रस भी लेकर आए हैं।


छात्र बोले: हमें भविष्य की झलक मिली

कार्यक्रम में शामिल छात्रों ने बातचीत को बेहद प्रेरणादायक बताया। एक छात्र ने कहा, "शुक्ला सर के अनुभव से हमें अंतरिक्ष में करियर की संभावनाएं समझ आईं।"

इस कार्यक्रम में लखनऊ, रायबरेली, हरदोई और सीतापुर के कुल 150 छात्र शामिल हुए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और ISRO के वैज्ञानिकों ने भी स्पेस टेक्नोलॉजी पर जानकारी दी।


41 साल बाद कोई भारतीय पहुंचा अंतरिक्ष

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 26 जून 2025 को अमेरिका के एक्सियम मिशन-4 के तहत अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचे हैं। वे राकेश शर्मा (1984) के बाद स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय और ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं।

उनका यह मिशन भारत के गगनयान प्रोग्राम के लिए उपयोगी अनुभव उपलब्ध कराएगा, जो 2027 में लॉन्च किया जा सकता है।


छात्रों से जुड़े एस्ट्रोनॉट, जो बने प्रेरणा का स्रोत

शुभांशु ने छात्रों से बातचीत में यह भी कहा कि "सपने देखिए और उन्हें पाने की दिशा में मेहनत करिए। विज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, और भारत के युवाओं में वह क्षमता है जो अंतरिक्ष तक पहुंच सकती है।"

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04 Jul 2025 By दैनिक जागरण

अंतरिक्ष से छात्रों को शुभांशु का संदेश: "उड़ने का डर रहता है, खुद को बांधकर सोता हूं"

Jagran Desk

CMS स्कूल की कानपुर रोड ब्रांच में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने वीडियो कॉल के जरिए शुभांशु से सवाल पूछे। उन्होंने लाइव सेशन के दौरान स्पेस में तैरती गेंद से खेलकर जीरो ग्रैविटी का अनुभव दिखाया।


"स्पेस में नींद के लिए खुद को बांधना पड़ता है"

एक छात्र द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में शुभांशु ने बताया, "अंतरिक्ष में फर्श या छत जैसी कोई चीज नहीं होती, इसलिए नींद के समय खुद को विशेष पट्टियों से बांधना पड़ता है ताकि शरीर तैरकर कहीं और न चला जाए।"

उन्होंने मज़ाक में जोड़ा, "स्पेस में उड़ने का डर हमेशा बना रहता है, खासकर नींद के वक्त!"


योग और एक्सरसाइज से रखते हैं खुद को फिट

शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष में शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में रोज़ाना योग और एक्सरसाइज जरूरी होती है। वहां विशेष एक्सरसाइज मशीन होती हैं, जिनमें सीट नहीं होती, बस पैडल से खुद को बांधकर कसरत करनी होती है।


मनोरंजन और मानसिक सेहत का खास ध्यान

उन्होंने कहा कि स्पेस में मानसिक सेहत बनाए रखने के लिए परिवार और दोस्तों से संपर्क में रहना बहुत जरूरी है। टेक्नोलॉजी के जरिए नियमित रूप से कॉल और वीडियो से बातचीत की सुविधा होती है।


‘मिशन से पहले का खाना साथ लाते हैं’

खाद्य सामग्री के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ज्यादातर एस्ट्रोनॉट वही खाना लेते हैं जिसे वे धरती पर खाते थे। उन्होंने बताया कि वे अपने साथ गाजर का हलवा, मूंग दाल हलवा और आम रस भी लेकर आए हैं।


छात्र बोले: हमें भविष्य की झलक मिली

कार्यक्रम में शामिल छात्रों ने बातचीत को बेहद प्रेरणादायक बताया। एक छात्र ने कहा, "शुक्ला सर के अनुभव से हमें अंतरिक्ष में करियर की संभावनाएं समझ आईं।"

इस कार्यक्रम में लखनऊ, रायबरेली, हरदोई और सीतापुर के कुल 150 छात्र शामिल हुए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और ISRO के वैज्ञानिकों ने भी स्पेस टेक्नोलॉजी पर जानकारी दी।


41 साल बाद कोई भारतीय पहुंचा अंतरिक्ष

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 26 जून 2025 को अमेरिका के एक्सियम मिशन-4 के तहत अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पहुंचे हैं। वे राकेश शर्मा (1984) के बाद स्पेस में जाने वाले दूसरे भारतीय और ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं।

उनका यह मिशन भारत के गगनयान प्रोग्राम के लिए उपयोगी अनुभव उपलब्ध कराएगा, जो 2027 में लॉन्च किया जा सकता है।


छात्रों से जुड़े एस्ट्रोनॉट, जो बने प्रेरणा का स्रोत

शुभांशु ने छात्रों से बातचीत में यह भी कहा कि "सपने देखिए और उन्हें पाने की दिशा में मेहनत करिए। विज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, और भारत के युवाओं में वह क्षमता है जो अंतरिक्ष तक पहुंच सकती है।"

https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/students-are-afraid-of-flying-the-message-of-shubhanshu-from/article-26456

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