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ट्रंप के टैरिफ बम से हिली वॉल स्ट्रीट: जानिए भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जापान और साउथ कोरिया पर 25% टैरिफ लगाने के फैसले ने वॉल स्ट्रीट को झटका दिया है।
सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार के तीनों प्रमुख इंडेक्स Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq लाल निशान पर बंद हुए। इस वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। आइए समझते हैं कि भारत के निवेशकों के लिए आज का दिन कैसा रह सकता है।
अमेरिकी बाजार में गिरावट: Dow Jones 500 अंक टूटा
राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 जुलाई की टैरिफ डेडलाइन को बढ़ाकर 1 अगस्त कर दिया, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने जापान और कोरिया पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की, जिससे अमेरिकी बाजारों में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
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Dow Jones करीब 500 अंकों की गिरावट के साथ 44,406.36 पर बंद हुआ।
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S&P 500 में भी लगभग 50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
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बाजार के जानकार इसे अनिश्चितता से प्रेरित अस्थाई गिरावट मान रहे हैं।
भारत पर असर: बाजार पर दिख सकता है ट्रंप इफेक्ट
हालांकि अमेरिकी फैसले का सीधा असर भारत पर नहीं पड़ा है, लेकिन वैश्विक बाजारों की गिरावट का मनोवैज्ञानिक दबाव भारतीय निवेशकों पर भी हो सकता है।
पॉजिटिव संकेत:
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ट्रंप सरकार की ओर से भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।
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विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारत में स्थिर रुख बनाए हुए हैं।
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सरकार की ओर से वित्तीय अनुशासन और रिफॉर्म पर जोर दिया जा रहा है।
सैमसंग की गिरती कमाई भी एक फैक्टर
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने दूसरी तिमाही में 56% ऑपरेटिंग प्रॉफिट गिरने का अनुमान जताया है।
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लाभ: 4.6 ट्रिलियन वॉन, जबकि अनुमान था 6.2 ट्रिलियन
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यह पिछले 6 क्वार्टर का सबसे कमजोर प्रदर्शन है
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इसका असर टेक्नोलॉजी शेयरों पर देखा जा सकता है, खासकर हाई-बीटा स्टॉक्स पर
कच्चे तेल की कीमतों में राहत
बीते सत्र में करीब 2% की तेजी के बाद अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है:
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ब्रेंट क्रूड: $69.37 प्रति बैरल (0.30% गिरावट)
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WTI क्रूड: $67.69 प्रति बैरल (0.35% गिरावट)
तेल कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
निवेशकों के लिए सलाह
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आज के कारोबार में सावधानी बरतना जरूरी रहेगा।
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मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में हल्की अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
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IT, टेक और मेटल सेक्टर पर विशेष नजर रखें।
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ऑयल कंपनियों, एविएशन और एफएमसीजी सेक्टर को कच्चे तेल की कीमतों से राहत मिल सकती है।
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ट्रंप के टैरिफ बम से हिली वॉल स्ट्रीट: जानिए भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
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सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार के तीनों प्रमुख इंडेक्स Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq लाल निशान पर बंद हुए। इस वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। आइए समझते हैं कि भारत के निवेशकों के लिए आज का दिन कैसा रह सकता है।
अमेरिकी बाजार में गिरावट: Dow Jones 500 अंक टूटा
राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 जुलाई की टैरिफ डेडलाइन को बढ़ाकर 1 अगस्त कर दिया, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने जापान और कोरिया पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की, जिससे अमेरिकी बाजारों में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
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Dow Jones करीब 500 अंकों की गिरावट के साथ 44,406.36 पर बंद हुआ।
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S&P 500 में भी लगभग 50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
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बाजार के जानकार इसे अनिश्चितता से प्रेरित अस्थाई गिरावट मान रहे हैं।
भारत पर असर: बाजार पर दिख सकता है ट्रंप इफेक्ट
हालांकि अमेरिकी फैसले का सीधा असर भारत पर नहीं पड़ा है, लेकिन वैश्विक बाजारों की गिरावट का मनोवैज्ञानिक दबाव भारतीय निवेशकों पर भी हो सकता है।
पॉजिटिव संकेत:
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ट्रंप सरकार की ओर से भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।
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विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारत में स्थिर रुख बनाए हुए हैं।
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सरकार की ओर से वित्तीय अनुशासन और रिफॉर्म पर जोर दिया जा रहा है।
सैमसंग की गिरती कमाई भी एक फैक्टर
सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने दूसरी तिमाही में 56% ऑपरेटिंग प्रॉफिट गिरने का अनुमान जताया है।
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लाभ: 4.6 ट्रिलियन वॉन, जबकि अनुमान था 6.2 ट्रिलियन
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यह पिछले 6 क्वार्टर का सबसे कमजोर प्रदर्शन है
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इसका असर टेक्नोलॉजी शेयरों पर देखा जा सकता है, खासकर हाई-बीटा स्टॉक्स पर
कच्चे तेल की कीमतों में राहत
बीते सत्र में करीब 2% की तेजी के बाद अब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है:
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ब्रेंट क्रूड: $69.37 प्रति बैरल (0.30% गिरावट)
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WTI क्रूड: $67.69 प्रति बैरल (0.35% गिरावट)
तेल कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
निवेशकों के लिए सलाह
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आज के कारोबार में सावधानी बरतना जरूरी रहेगा।
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मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में हल्की अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
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IT, टेक और मेटल सेक्टर पर विशेष नजर रखें।
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ऑयल कंपनियों, एविएशन और एफएमसीजी सेक्टर को कच्चे तेल की कीमतों से राहत मिल सकती है।
