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महाराष्ट्र में 1 जुलाई से थम सकते हैं पहिए! ट्रक और निजी बस ऑपरेटरों ने किया अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
Jagran Desk
महाराष्ट्र में निजी बस और ट्रक ऑपरेटरों ने अपनी मांगें पूरी न होने तक 1 जुलाई से राज्यभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है।
यह फैसला ट्रांसपोर्टरों के संगठन ‘वहतुकदार बचाओ क्रुति समिति’ के बैनर तले लिया गया है, जिसमें निजी बस और ट्रक संचालक एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि राज्य में ई-चालान के जरिए जबरदस्त जुर्माना वसूली, खराब बुनियादी ढांचा और यातायात नियमों में लचीलापन न होने जैसे मुद्दों का समाधान नहीं किया गया है। इससे नाराज होकर ट्रांसपोर्टरों ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि 16 जून से मुंबई के आजाद मैदान में ट्रांसपोर्टरों का अनिश्चितकालीन धरना भी चल रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने का आश्वासन दिया था, जिसपर ट्रांसपोर्टरों ने अपना विरोध कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था। हालांकि, अगर 30 जून तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो वे राज्यभर में सभी बस और ट्रक सेवाओं को पूरी तरह ठप करने का निर्णय ले चुके हैं।
कई परिवहन संघों का मिला समर्थन:
मुंबई बस मालिक संगठन (MBMS) समेत राज्यभर के अन्य बस और ट्रक संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तो 1 जुलाई से सभी वाहनों की चाबी बंद कर दी जाएगी, जिससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
क्या हैं ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगें?
पुणे के ट्रांसपोर्टर नेता बाबा शिंदे के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं —
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ई-चालान से जुर्माने की जबरदस्त वसूली तुरंत बंद हो
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पुराने जुर्माने पूरी तरह माफ हों
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भारी वाहनों के लिए क्लीनर रखने का नियम रद्द किया जाए
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महानगरों में वाहनों के प्रवेश के लिए निर्धारित समय में बदलाव किया जाए
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टरों की यह हड़ताल अगर लागू हो जाती है तो राज्य में जनजीवन और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच होने वाली आगे की बैठकों और फैसलों पर टिक चुकी हैं।
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महाराष्ट्र में 1 जुलाई से थम सकते हैं पहिए! ट्रक और निजी बस ऑपरेटरों ने किया अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
Jagran Desk
यह फैसला ट्रांसपोर्टरों के संगठन ‘वहतुकदार बचाओ क्रुति समिति’ के बैनर तले लिया गया है, जिसमें निजी बस और ट्रक संचालक एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि राज्य में ई-चालान के जरिए जबरदस्त जुर्माना वसूली, खराब बुनियादी ढांचा और यातायात नियमों में लचीलापन न होने जैसे मुद्दों का समाधान नहीं किया गया है। इससे नाराज होकर ट्रांसपोर्टरों ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
गौरतलब है कि 16 जून से मुंबई के आजाद मैदान में ट्रांसपोर्टरों का अनिश्चितकालीन धरना भी चल रहा है। इससे पहले महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने का आश्वासन दिया था, जिसपर ट्रांसपोर्टरों ने अपना विरोध कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था। हालांकि, अगर 30 जून तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो वे राज्यभर में सभी बस और ट्रक सेवाओं को पूरी तरह ठप करने का निर्णय ले चुके हैं।
कई परिवहन संघों का मिला समर्थन:
मुंबई बस मालिक संगठन (MBMS) समेत राज्यभर के अन्य बस और ट्रक संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तो 1 जुलाई से सभी वाहनों की चाबी बंद कर दी जाएगी, जिससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
क्या हैं ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगें?
पुणे के ट्रांसपोर्टर नेता बाबा शिंदे के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगें हैं —
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ई-चालान से जुर्माने की जबरदस्त वसूली तुरंत बंद हो
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पुराने जुर्माने पूरी तरह माफ हों
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भारी वाहनों के लिए क्लीनर रखने का नियम रद्द किया जाए
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महानगरों में वाहनों के प्रवेश के लिए निर्धारित समय में बदलाव किया जाए
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टरों की यह हड़ताल अगर लागू हो जाती है तो राज्य में जनजीवन और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच होने वाली आगे की बैठकों और फैसलों पर टिक चुकी हैं।
